कई बार किसी क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या बाहर से नहीं आती, बल्कि धीरे-धीरे उसके अपने समाज के अंदर ही जन्म लेने लगती है। सड़कें बन सकती हैं, स्कूल बन सकते हैं, अस्पताल बन सकते हैं और सरकारें भी बदल सकती हैं, लेकिन अगर समाज के लोग ही एक-दूसरे से बंट जाएँ, तो विकास की रफ्तार अपने आप धीमी पड़ जाती है। आज अगर कोई मुझसे पूछे कि Mewat Ground Reality में सबसे बड़ी चुनौती क्या है, तो मैं बिना झिझक कहूँगा कि यह केवल Education या बेरोज़गारी की समस्या नहीं है, बल्कि समाज के भीतर बढ़ती आपसी दूरी भी उतनी ही बड़ी समस्या बन चुकी है। यही वह सच्चाई है जिस पर खुलकर बात होना बहुत जरूरी है।
Mewat Ground Reality की अगर ईमानदारी से बात करें, तो सबसे पहली और सबसे बड़ी चुनौती आज भी Education System है। इस विषय पर मैं पहले भी कई बार लिख चुका हूँ कि जब तक मेवात में Quality Education, अच्छे Schools, Colleges, Universities और Career Guidance मजबूत नहीं होंगे, तब तक युवाओं का भविष्य पूरी तरह नहीं बदल सकता। लेकिन आज मैं जिस दूसरी बड़ी समस्या की बात कर रहा हूँ, उस पर शायद बहुत कम लोग खुलकर चर्चा करते हैं। यह समस्या है—समाज का छोटे-छोटे गुटों में बँट जाना। यह बात कड़वी जरूर है, लेकिन Ground Reality यही है कि आज मेवात के बहुत से गाँवों में चुनाव खत्म होने के बाद भी चुनावी माहौल खत्म नहीं होता।
गाँवों की वास्तविक स्थिति यह है कि जैसे ही Sarpanch Election नज़दीक आते हैं, पूरे गाँव में अलग-अलग Political Groups बन जाते हैं। कोई Congress का समर्थक होता है, कोई BJP का, कोई दूसरे दल के साथ खड़ा होता है। चुनाव होना लोकतंत्र का हिस्सा है और हर व्यक्ति को अपनी पसंद का उम्मीदवार चुनने का पूरा अधिकार है। लेकिन समस्या वहाँ से शुरू होती है जहाँ चुनाव खत्म होने के बाद भी लोग पाँच साल तक एक-दूसरे को विरोधी मानकर चलते रहते हैं। गाँव दो हिस्सों में बँट जाता है, रिश्तों में दूरी आ जाती है और विकास से ज्यादा चर्चा इस बात की होने लगती है कि कौन किस पार्टी के साथ है।
यही वह गलती है जो मेरे हिसाब से आज मेवात का युवा सबसे ज्यादा कर रहा है। वह अपनी ऊर्जा, अपना समय और अपनी सोच उन बहसों में खर्च कर देता है जिनसे उसके भविष्य पर कोई सकारात्मक असर नहीं पड़ता। अगर यही समय पढ़ाई, Skill Development, Business, खेती में नई Technology, Competitive Exams या किसी नए हुनर को सीखने में लगाया जाए, तो शायद पाँच साल बाद वही युवा अपने परिवार और पूरे गाँव की तस्वीर बदल सकता है। लेकिन अफसोस की बात यह है कि कई बार हम विकास से ज्यादा राजनीति की बहसों में उलझ जाते हैं।
यहाँ मैं एक बात बिल्कुल साफ करना चाहता हूँ। इस समस्या का पूरा दोष न तो सरकार को दिया जा सकता है और न ही केवल प्रशासन को। Police और Administration कानून-व्यवस्था बनाए रखने का काम कर सकते हैं, लेकिन समाज के टूटे हुए रिश्तों को जोड़ना उनके बस की बात नहीं है। अगर दो परिवार, दो मोहल्ले या दो राजनीतिक गुट पाँच साल तक एक-दूसरे से दूरी बनाए रखें, तो इसका समाधान किसी थाने या किसी सरकारी दफ्तर में नहीं मिलेगा। इसका समाधान समाज के अंदर से ही निकलेगा। गाँव के बुजुर्गों, शिक्षकों, इमामों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पढ़े-लिखे युवाओं और जिम्मेदार लोगों को आगे आना होगा।
Mewat Ground Reality हमें यह भी सिखाती है कि चुनाव पाँच साल में एक बार आते हैं, लेकिन विकास हर दिन होना चाहिए। चुनाव के समय जिसको वोट देना है, उसे दीजिए। जिस उम्मीदवार को बेहतर समझते हैं, उसका समर्थन कीजिए। लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद फिर पूरा गाँव एक होना चाहिए। सड़क, स्कूल, अस्पताल, पानी, बिजली, रोजगार और शिक्षा किसी एक पार्टी के लिए नहीं बनते, बल्कि पूरे समाज के लिए बनते हैं। अगर गाँव के लोग आपस में ही बँटे रहेंगे, तो विकास के मुद्दे पीछे छूट जाएँगे और व्यक्तिगत विवाद आगे आ जाएँगे।
आज मेवात का युवा मेहनती है। इसमें कोई शक नहीं। कोई Army की तैयारी कर रहा है, कोई Driving करता है, कोई खेती करता है, कोई छोटा Business चला रहा है। लेकिन अगर यही मेहनत आपसी झगड़ों, बेवजह की राजनीति और छोटी-छोटी दुश्मनियों में बर्बाद होती रही, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान आने वाली पीढ़ी को होगा। हमें अपने बच्चों को यह सिखाना होगा कि असली मुकाबला अपने ही गाँव के लोगों से नहीं, बल्कि देश के लाखों प्रतिभाशाली युवाओं से है। अगर हमें आगे बढ़ना है, तो हमें Education, Technology, Skills और Innovation में उनसे बेहतर बनना होगा।
मैं, Nasir Buchiya, व्यक्तिगत रूप से मानता हूँ कि मेवात को बदलने के लिए केवल सरकार बदलना काफी नहीं होगा। सबसे पहले हमें अपनी सोच बदलनी होगी। मेरा मानना है कि Sarpanch Election हो, MLA Election हो या Lok Sabha Election, चुनाव लोकतंत्र का उत्सव है। चुनाव के दौरान मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद पूरे गाँव को फिर एक परिवार की तरह हो जाना चाहिए। अगर हम पाँच साल तक केवल गुटबाजी करते रहेंगे, तो सबसे बड़ा नुकसान हमारे अपने बच्चों का होगा। न Education मजबूत होगी, न Industries आएँगी, न रोजगार बढ़ेगा और न ही गाँव आगे बढ़ पाएगा।
मेरी राय में अब समय आ गया है कि मेवात का युवा अपनी सबसे बड़ी ताकत को पहचाने। उसकी ताकत लड़ाई नहीं, बल्कि एकता है। उसकी ताकत राजनीति नहीं, बल्कि शिक्षा है। उसकी ताकत नफरत नहीं, बल्कि मेहनत है। जिस दिन मेवात का युवा यह समझ जाएगा कि असली जीत अपने ही भाई को हराने में नहीं, बल्कि अपने पूरे गाँव को आगे बढ़ाने में है, उसी दिन Mewat Ground Reality बदलनी शुरू हो जाएगी। क्योंकि इतिहास गवाह है कि जिन समाजों ने शिक्षा और एकता को अपनाया, वही समाज आने वाले समय में सबसे ज्यादा तरक्की कर पाए।
इसलिए आज मैं मेवात के हर युवा से केवल एक बात कहना चाहता हूँ—चुनाव लड़िए, अपने विचार रखिए, लोकतंत्र में भाग लीजिए, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद फिर से एक हो जाइए। अगले पाँच साल राजनीति नहीं, बल्कि Education, Development, Employment और अपने बच्चों के Future की राजनीति कीजिए। मुझे पूरा विश्वास है कि अगर मेवात का युवा इस एक बदलाव को स्वीकार कर ले, तो आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र की तस्वीर बदलने से कोई नहीं रोक सकता।
Writer: Nasir Buchiya
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