Mewat Ground Reality: मेवात के हर गांव में Army जवान क्यों निकलते हैं?


किसी भी क्षेत्र की पहचान केवल उसकी इमारतों, सड़कों या शहरों से नहीं होती, बल्कि वहाँ के लोगों के चरित्र से होती है। कुछ क्षेत्रों की पहचान व्यापार से होती है, कुछ की शिक्षा से और कुछ की उद्योगों से। लेकिन भारत के नक्शे पर एक ऐसा इलाका भी है, जहाँ की पहचान का एक बहुत बड़ा हिस्सा उन नौजवानों से जुड़ा हुआ है जो हर साल अपने सीने पर तिरंगा लगाने का सपना लेकर सुबह अंधेरे में दौड़ना शुरू कर देते हैं। शायद बहुत कम लोग इस सच्चाई को जानते हैं, लेकिन यह Mewat Ground Reality का वह पहलू है जिस पर आज भी बहुत कम चर्चा होती है।


अगर किसी बाहरी व्यक्ति से पूछा जाए कि मेवात की सबसे बड़ी पहचान क्या है, तो शायद उसके मन में Social Media पर दिखाई जाने वाली कुछ नकारात्मक खबरें ही आएँगी। लेकिन जो लोग मेवात की मिट्टी को करीब से जानते हैं, वे एक अलग ही तस्वीर बताते हैं। Mewat Ground Reality यह कहती है कि शायद ही कोई ऐसा गाँव होगा जहाँ कोई न कोई Fauji न हो। कई गाँव ऐसे हैं जहाँ एक ही परिवार की दो-दो और तीन-तीन पीढ़ियाँ भारतीय सेना में सेवा दे चुकी हैं। यह कोई संयोग नहीं है, बल्कि वर्षों से चली आ रही एक ऐसी परंपरा है जो आज भी युवाओं को देश सेवा के लिए प्रेरित करती है।


यहाँ एक बड़ा सवाल खड़ा होता है कि आखिर मेवात के लगभग हर गाँव से Army में जवान क्यों निकलते हैं? क्या इसकी वजह केवल Government Job है? क्या इसकी वजह केवल Salary है? अगर Ground Reality को देखा जाए, तो इसका जवाब "नहीं" है। मेवात का युवा Army को केवल नौकरी के रूप में नहीं देखता, बल्कि Deshbhakti, Respect, Discipline और परिवार के सम्मान के रूप में देखता है। यहाँ जब कोई बेटा Army की वर्दी पहनता है, तो केवल उसका परिवार खुश नहीं होता, बल्कि पूरा गाँव गर्व महसूस करता है। गाँव के बुजुर्ग उसे दुआ देते हैं, बच्चे उसे अपना आदर्श मानते हैं और माता-पिता उसके नाम से सम्मान महसूस करते हैं। मेरे अनुभव में मेवात में शायद ही किसी पेशे को उतनी इज्जत मिलती हो, जितनी एक Fauji को मिलती है।


Mewat Ground Reality का एक और खूबसूरत पहलू यह है कि यहाँ Army में जाने का सपना किसी एक परिवार तक सीमित नहीं रहता। अगर एक घर का लड़का भर्ती होता है, तो अगले साल उसी गाँव के कई और लड़के भी तैयारी शुरू कर देते हैं। बड़े भाई छोटे भाई को प्रेरित करते हैं, चाचा अपने भतीजे को दौड़ने के लिए उठाते हैं और कई बार पूरा गाँव सुबह के समय युवाओं को मैदानों और सड़कों पर दौड़ते हुए देखता है। यह केवल Physical Training नहीं होती, बल्कि एक ऐसी सोच होती है जो मेहनत, अनुशासन और देश सेवा की भावना से जुड़ी होती है।


लेकिन इस कहानी का एक और महत्वपूर्ण पहलू भी है। अगर 100 युवा Army की तैयारी करते हैं, तो उनमें से केवल 1 या 2 का ही Selection हो पाता है। इसका मतलब यह नहीं कि बाकी 98 युवा मेहनती नहीं थे। इसका मतलब केवल इतना है कि Competition बहुत बड़ा है। इसलिए हमें अपने युवाओं को यह भी समझाना होगा कि Army उनका सपना जरूर हो, लेकिन उनका पूरा भविष्य केवल एक ही रास्ते पर निर्भर नहीं होना चाहिए। अगर Selection हो जाए तो यह पूरे मेवात के लिए गर्व की बात है, लेकिन अगर किसी कारण से Selection न हो, तो Education, Graduation, Skill Development, ITI, Polytechnic, SSC, Railway, Police और अन्य Professional Careers भी उनके सामने खुले रहने चाहिए। क्योंकि देश सेवा केवल Army की वर्दी पहनकर ही नहीं, बल्कि Doctor, Engineer, Teacher, Scientist, Police Officer और IAS Officer बनकर भी की जा सकती है।


यहीं पर Mewat Ground Reality हमें एक और महत्वपूर्ण संदेश देती है। अगर मेवात का युवा रोज सुबह चार बजे उठकर कई किलोमीटर दौड़ सकता है, कठिन Physical Training कर सकता है, सालों तक अनुशासन के साथ तैयारी कर सकता है और हार नहीं मानता, तो इसका मतलब है कि उसके अंदर मेहनत करने की अद्भुत क्षमता पहले से मौजूद है। अब जरूरत केवल इतनी है कि यही मेहनत Education की तरफ भी बढ़े। अगर यही Discipline पढ़ाई में दिखाई दे, यही लगन Competitive Exams में दिखाई दे और यही जुनून Skill Development में लगाया जाए, तो आने वाले समय में मेवात केवल Army के लिए ही नहीं, बल्कि IAS, IPS, Doctors, Engineers, Professors और Entrepreneurs के लिए भी पूरे देश में जाना जाएगा।


मैं, Nasir Buchiya, व्यक्तिगत रूप से मानता हूँ कि मेवात की सबसे बड़ी ताकत उसकी मेहनती और देशभक्त युवा पीढ़ी है। बाहर बैठकर मेवात को समझना आसान है, लेकिन मेवात की असली पहचान उसकी मिट्टी में छिपे उन लाखों युवाओं से है जो अपने परिवार, अपने समाज और अपने देश का नाम रोशन करना चाहते हैं। मैंने अपने आसपास ऐसे अनेक युवा देखे हैं जो बिना किसी बड़ी सुविधा के, बिना किसी महंगी Coaching के, केवल अपने हौसले के दम पर Army की तैयारी करते हैं। यह जज़्बा अपने आप में मेवात की सबसे बड़ी पूँजी है।


लेकिन अब समय बदल रहा है और इसके साथ हमारी सोच भी बदलनी चाहिए। Army का सपना हमेशा जिंदा रहना चाहिए, लेकिन उसके साथ-साथ Education को भी उतनी ही प्राथमिकता देनी होगी। Schools को मजबूत करना होगा। Colleges और Universities मेवात के अंदर स्थापित करने होंगे। Career Guidance Centres बनाने होंगे। Parents को बच्चों को केवल एक नौकरी तक सीमित नहीं रखना होगा, बल्कि उन्हें हर बड़े क्षेत्र के बारे में जानकारी देनी होगी। क्योंकि जिस दिन मेवात का युवा Army की तैयारी के साथ-साथ Quality Education और Professional Skills को भी अपनाएगा, उसी दिन मेवात का भविष्य एक नई दिशा में आगे बढ़ना शुरू कर देगा।


अंत में मैं केवल इतना कहना चाहता हूँ कि अगर आज कोई मुझसे पूछे कि मेवात की सबसे बड़ी ताकत क्या है, तो मेरा जवाब होगा—न इसकी जमीन, न इसकी इमारतें और न ही इसकी सड़कें। मेवात की सबसे बड़ी ताकत उसके मेहनती, ईमानदार और देशभक्त युवा हैं। और अगर इन्हीं युवाओं को मजबूत Education System, सही Career Guidance और बेहतर अवसर मिल जाएँ, तो वह दिन दूर नहीं जब Mewat Ground Reality की पहचान केवल Army तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह क्षेत्र देश को सबसे अधिक Officers, Doctors, Engineers, Scientists और Leaders देने वाले इलाकों में भी शामिल होगा। यही वह सपना है जिसे हमें मिलकर सच करना है।


Writer: Nasir Buchiya

Website: https://hindimewati.blogspot.com


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